बसंत पंचमी का महत्व, पूजन विधि, शुभ योग एवं कथा 

On: January 22, 2026 10:23 PM
Follow Us:
significance of Basant Panchami

हिंदू धर्म में वसंत पंचमी को विद्या, विवेक और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान बताया गया है. इस दिन देवी को उनके प्रिय भोग, फल और पीले वस्त्र अर्पित करने से विशेष फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी पर पूजा करने से पुराने दोष कम होते हैं और ज्ञान का मार्ग खुलता है।

पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाती है। वर्ष 2026 में वसंत पंचमी का पर्व कल 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस पर्व की तिथि की शुरुआत 23 जनवरी यानी शुक्रवार रात में 2 बजकर 33 मिनट पर होगा और तिथि का समापन 24 जनवरी यानी शनिवार रात में 1 बजकर 46 मिनट पर होगा।

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा का मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 7 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।

बसंत पंचमी शुभ संयोग

ज्योतिषि के अनुसार, यह दिन विशेष इसलिए माना जाता है क्योंकि यह दिन अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में आता है। अर्थात इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया वाहन खरीदना, संपत्ति से जुड़े सौदे या किसी नए काम की शुरुआत बिना किसी मुहूर्त के की जा सकती है। इस वर्ष बसंत पंचमी के दिन कई दुर्लभ संयोगों का निर्माण होने जा रहा है। इस दिन परिधि योग और शिव योग का प्रभाव रहेगा, जिसे आध्यात्मिक उन्नति और कार्यों में सफलता देने वाला माना जाता है। इसके अतिरिक्ति, रवि योग का निर्माण भी हो रहा है, जो नकारात्मक प्रभावों को कम करता है और मान-सम्मान में वृद्धि करता है। इन योगों में की गई पूजा और शुभ कार्य लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।

इसके अतिरिक्ति, इस दिन रवि योग का निर्माण भी होगा जिसका मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर 24 जनवरी को सुबह 7 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

बसंत पंचमी पूजन विधि

वसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है. इस दिन पूरे विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है. पूजा के लिए मां सरस्वती की प्रतिमा को पीले रंग के वस्त्र पर स्थापित करें और रोली, मौली, हल्दी, केसर, अक्षत, पीले या सफेद पुष्प तथा पीली मिठाई अर्पित करें। इसके बाद मां सरस्वती की वंदना करें और पूजा स्थल पर पुस्तकों व वाद्य यंत्रों को रखें। पूजा की सभी तैयारियों के पश्चात बच्चों को पूजा स्थल पर बैठाकर आशीर्वाद दिलवाएं। बसंत ऋतु के आगमन के कारण इस दिन देवी को गुलाब अर्पित करने की परंपरा है, साथ ही गुलाल से एक-दूसरे को टीका भी लगाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी जैसे अनेक नामों से भी पूजा जाता है।

बसंत पंचमी मंत्र

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥

प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह ऋतुओं में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का फूल मानो सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर मांजर (बौर) आ जाता और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। भर-भर भंवरे भंवराने लगते। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा उत्सव मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था।

वसंत पंचमी कथा

उपनिषदों की कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभिक काल में ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। किन्तु अपनी संरचना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। हालांकि उपनिषद व पुराण ऋषियों को अपना-अपना अनुभव है, अगर यह हमारे पवित्र सत ग्रंथों से मेल नहीं खाता तो यह मान्य नहीं है।

तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमण्डल से जल अपने हथेली में लेकर संकल्प स्वरूप उस जल को छिड़कर भगवान श्री विष्णु की स्तुति करनी आरम्भ की। ब्रह्मा जी के किये स्तुति को सुन कर भगवान विष्णु तत्काल ही उनके सम्मुख प्रकट हो गए और उनकी समस्या जानकर भगवान विष्णु ने आदिशक्ति दुर्गा माता का आव्हान किया। विष्णु जी के द्वारा आव्हान होने के कारण भगवती दुर्गा वहां तुरंत ही प्रकट हो गयीं तब ब्रम्हा एवं विष्णु जी ने उन्हें इस संकट को दूर करने का निवेदन किया।

ब्रम्हा जी तथा विष्णु जी बातों को सुनने के बाद उसी क्षण आदिशक्ति दुर्गा माता के शरीर से स्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ में वर मुद्रा थे। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति श्री दुर्गा के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही उन देवी ने वीणा का मधुरनाद किया जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब सभी देवताओं ने शब्द और रस का संचार कर देने वाली उन देवी को वाणी की अधिष्ठात्री देवी “सरस्वती” कहा।

फिर आदिशक्ति भगवती दुर्गा ने ब्रम्हा जी से कहा कि मेरे तेज से उत्पन्न हुई ये देवी सरस्वती आपकी पत्नी बनेंगी, जैसे लक्ष्मी श्री विष्णु की शक्ति हैं, पार्वती महादेव शिव की शक्ति हैं उसी प्रकार ये सरस्वती देवी ही आपकी शक्ति होंगी। ऐसा कह कर आदिशक्ति श्री दुर्गा सब देवताओं के देखते – देखते वहीं अंतर्धान हो गयीं। इसके बाद सभी देवता सृष्टि के संचालन में संलग्न हो गए।

सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। वसंत पंचमी के दिन को इनके प्रकटोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और तभी से इस वरदान के फलस्वरूप भारत देश में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है। – साभार। 

विनोद सिंह गढ़िया

विनोद सिंह गढ़िया इस पोर्टल के फाउंडर और कंटेंट क्रिएटर है। करीब 15 वर्षों से वे विभिन्न डिजिटल मंचों के माध्यम से उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन आदि से जुड़े लेख और सम-सामयिक घटनाओं पर आधारित समाचार आप सभी तक पहुंचाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment