उत्तराखंड के कुमाऊं में होली का अनूठा अंदाज देखते ही बनता है। पौष के माह से आरंभ होने वाली होली में चीर बांधने से लेकर उसके दहन तक का खास आकर्षण है। एकादशी के दिन गांव के किसी सार्वजनिक स्थल या देवस्थल में चीर की स्थापना की जाती है। एकादशी को भद्रादि रहित शुभमुहूर्त में गांव के किसी देवस्थल या सार्वजनिक स्थान पर लोग एकत्रित होते हैं। बांस या चीड़ का लंबा ध्वजस्तंभ लिया जाता है। इसके ऊपरी सिरे पर गोलकार में एक लकड़ी बांधी जाती है। इसे चीर कहा जाता है। इसकी विधिवत पूजा होती है। गांव के लोग इसकी पूजा के लिये पुष्प, धूप-बाती के साथ ही अबीर-गुलाल से रंजित कपड़ा भी लाते हैं। जिसे चीर पर बांधा जाता है। भक्ति से संबंधित होली गायन भी होता है। इसके बाद से रंगभरी होली की शुरूआत हो जाती है।
उत्तराखंड में होली की शुरुआत भगवान गणेश को समर्पित गीतों से होती है। जिसमें सिद्धि को दाता विघ्न विनाशन जैसे होली गीतों से होती है। यहाँ हम इस प्रसिद्ध होली के लिरिक्स आप सभी के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं –
Siddhi Ko Data Vighan Vinashan Holi Lyrics
सिद्धि को दाता, विघ्न विनाशन,
होली खेलें, गिरिजापति नन्दन ।२।
गौरी को नन्दन, मूषा को वाहन ।२।
होली खेलें, गिरिजापति नन्दन ।२।
सिद्धि…
लाओ भवानी अक्षत चन्दन।२।
तिलक लगाओ गिरजापति नन्दन,
होली खेलें गिरजापति नन्दन ।२।
सिद्धि….
लाओ भवानी पुष्प की माला ।२।
गले पहनाओ गिरजापति नन्दन,
होली खेलें गिरजापति नन्दन ।२।
सिद्धि….
लाओ भवानी, लड्डू वन थाली ।२।
भोग लगाओ, गिरजापति नन्दन,
होली खेलें गिरजापति नन्दन ।२।
सिद्धि….
गज मोतियन से चौक पुराऊं ।२।
होली खेलें गिरजापति नन्दन ।२।
सिद्धि….
ताल बजाये अंचन-कंचन ।२।
डमरु बजावें शम्भु विभूषन,
होली खेलें गिरजापति नन्दन ।२।
सिद्धि…
होली के प्रसिद्ध गीत –







