उत्तराखंड का फूलदेई त्योहार देशभर में छाया, आनंद महिंद्रा ने कहा-हर घर तक पहुंचे यह परंपरा

On: March 17, 2026 10:16 PM
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anand mahindra phooldei post

चैत्र की संक्रांति के दिन समस्त उत्तराखंड में फूलदेई का पर्व मनाया गया। जहाँ बच्चों ने परम्परानुसार गांव के प्रत्येक घर की देहरी पर फूल अर्पित कर शुभकामनायें प्रेषित की। वहीं डिजिटल युग में उत्तराखंड की संस्कृति से लगाव रखने वाले लोगों ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के माध्यम से इस पर्व की शुभकामनायें दी और इस पर्व से सभी को रूबरू कराया। इसी बीच प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा को जब फूलदेई के बारे में पता लगा तो वे इस लोकपर्व पर प्रभावित हो गए और एक पोस्ट लिखकर लोगों से पूरे देश में मनाने की अपील कर दी।

आधुनिकता के दौर पर जहाँ लोग अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं, वहीं उत्तराखंड के तीज-त्यौहार लोगों को उनकी संस्कृति से जोड़ने का काम कर रहे हैं। ऐसा ही एक त्यौहार है फूलदेई, जिसे हर वर्ष चैत्र माह की संक्रांति को मनाया जाता है। इस वर्ष 15 मार्च को जब यह त्यौहार उत्तराखंड में बड़े हर्षोल्लाष के साथ मनाया गया तो इस त्यौहार ने बिज़नेस लीडर और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा का भी दिल जीत लिया। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में इस पर्व के बारे में सभी को बताते हुए लिखा –

“मुझे स्वीकार करना होगा कि मैंने अभी तक फूलदेई के बारे में कभी नहीं सुना था। यह एक वसंत उत्सव है, जिसे कल उत्तराखंड के गांवों में मनाया गया। बच्चे पहाड़ों से ताज़े फूल एकत्रित करते हैं और घर-घर जाकर उन्हें देहरी (घर की चौखट) पर अर्पित हैं और घर के लिए आशीर्वाद देते हैं:

“फूल देई, छम्मा देई,
देनी द्वार, भर भकार…”
जिसका अर्थ है घर में सुख-समृद्धि की कामना करना। इसके बदले में उन्हें मिठाइयाँ मिलती हैं।

इसने मुझे थोड़ा सा अमेरिका के हैलोवीन की याद दिलाई, जहाँ बच्चे “ट्रिक ऑर ट्रीट” कहते हुए घर-घर जाते हैं। लेकिन यहाँ एक प्यारा अंतर है। यहाँ बच्चे कोई शरारत करने की धमकी नहीं देते, न ही पहले कुछ माँगते हैं, बल्कि पहले कुछ देने आते हैं तो फूल।

आज के समय में, जब हम पर्यावरण के प्रति जागरूकता की बात करते हैं, तब वसंत और प्रकृति का यह सुंदर उत्सव को कहीं अधिक व्यापक रूप में पहचान मिलनी चाहिए।
जिस तरह होली समस्त भारत और दुनिया में फैल गई, शायद फूल देई भी सभी जगह मनाना चाहिए।”
आनंद महिंद्रा के अंत में कहा –मेरे लिए, उत्तराखंड के बच्चे ही मेरी #MondayMotivation हैं।

फूलदेई पूरे उत्तराखंड में तो मनाया जाता है लेकिन इसे भारत के अन्य राज्यों के बहुत कम लोग इसके बारे जानते हैं, इसे खुद आनंद महिंद्रा भी स्वीकार करते हैं। इसी वजह से वे उत्तराखंड के फूलदेई त्यौहार को पूरे देश में मनाने की बात कहते हैं। इस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका आभार व्यक्त किया और उनकी एक्स पोस्ट पर आभार व्यक्त करते हुए लिखा – “आपके द्वारा देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और प्रकृति से जुड़े फूलदेई पर्व की भावना को अत्यंत सुंदर शब्दों में अभिव्यक्त किया गया है। यह पर्व हमारी संस्कृति में प्रकृति के प्रति आस्था, सद्भाव और समृद्धि के संदेश का प्रतीक है। विश्वास है कि आपके माध्यम से उत्तराखंड की यह अनूठी लोक परंपरा देश-दुनिया में और अधिक लोगों तक पहुँचेगी तथा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।

फूलदेई सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति ,प्रकृति प्रेम और बचपन की निश्छलता का प्रतीक है। जब अबोध बच्चे फूलों की टोकरी लेकर घरों की दहलीज पर पहुंचकर गीत आते हुए फूल अर्पित करते हैं तो पूरा वातावरण सकारात्मकता और सौहार्द से परिपूर्ण हो जाता है। यह पर्व बच्चों में सामाजिक सद्भाव और आपसी सहयोग की भावना को विकसित करता है।

उत्तराखंड के फूलदेई त्यौहार के बारे में विस्तृत जानने के लिए आप नीचे लिए गए लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं।

  1. उत्तराखंड की संस्कृति, प्रकृति और बचपन का अनोखा उत्सव।
  2. जानिए क्या होता है फूलदेई त्यौहार के दिन ?
  3. फूलदेई पर्व से जुड़े रोचक तथ्य।
  4. फूलदेई मनाने की तिथि, लोककथा और महत्व।

विनोद सिंह गढ़िया

विनोद सिंह गढ़िया इस पोर्टल के फाउंडर और कंटेंट क्रिएटर है। करीब 15 वर्षों से वे विभिन्न डिजिटल मंचों के माध्यम से उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन आदि से जुड़े लेख और सम-सामयिक घटनाओं पर आधारित समाचार आप सभी तक पहुंचाते हैं।

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