# उत्तराखंड पोस्ट > उत्तराखंड न्यूज़ | संस्कृति | पर्यटन | शिक्षा | सामाजिक मुद्दे ## Posts - [लोकसंस्कृति को बढ़ावा: कपकोट उत्तरायणी मेले में चाँचरी प्रतियोगिता, मिलेंगे 51 हजार।](https://www.uttarakhandpost.in/uttarayani-mela-kapkot-chanchari-competition/): कपकोट-भराड़ी में लगने वाले पारंपरिक उत्तरायणी मेले में इस बार कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति के विशेष रंग देखने को मिलेंगे। मेले में इस बार तल्ला, मल्ला, विचला दानपुर, मुनस्यारी, रंगीली नाकुरी समेत कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों की चांचरी की लटैक लोगों को आकर्षित करेगी। नगर पंचायत कपकोट के प्रयासों से इस बार क्षेत्र में लगने वाले उत्तरायणी मेले में कुमाऊँ की लोकनृत्य-गीत विधा चांचरी का भव्य आयोजन किया जायेगा। जिसके लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। यह आयोजन यहाँ प्रतियोगिता के तौर पर सम्पन्न होगा, जिसमें प्रथम और द्वितीय स्तर पर नगद पुरस्कार दिए जायेंगे। कपकोट-भराड़ी में हर वर्ष - [उत्तराखण्ड स्कूल हॉलिडे लिस्ट 2026 (माध्यमिक)](https://www.uttarakhandpost.in/uttarakhand-school-holiday-2026/): उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों के लिए वर्ष 2026 की वार्षिक अवकाश तालिका जारी कर दी गई है। यह अवकाश सूची राज्य के सभी राजकीय विद्यालयों पर लागू होगी। जारी तालिका में ग्रीष्मावकाश, शीतावकाश, सार्वजनिक अवकाशों के साथ-साथ कार्यदिवसों का स्पष्ट विवरण दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को पूरे वर्ष की योजना बनाने में सुविधा मिलेगी। वर्ष 2026 के लिए उत्तराखण्ड स्कूल हॉलिडे लिस्ट-   - ["पैली-पैली बार" उत्तराखण्डी गीत का हुआ विमोचन.](https://www.uttarakhandpost.in/uttarakhandi-song-paili-paili-baar-has-been-released/): मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में “पैली-पैली बार” उत्तराखण्डी गीत का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने सभी लोक गायकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह गीत सरकार के विकास कार्यों को जन-जन तक पहुंचाएगा। इन गीतों के माध्यम से समाज में जागरूकता आएगी और उत्तराखंड में पहली बार हुए विकास कार्यों से बड़ी संख्या में लोग अवगत हो सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहे हैं। लोक कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, - [बागेश्वर: पोथिंग इंटर कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी, 11वीं-12वीं की पढ़ाई प्रभावित](https://www.uttarakhandpost.in/pothing-inter-college-teachers-shortage-bageshwar/): Bageshwar News: बागेश्वर जिले के विकासखंड कपकोट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज, पोथिंग में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। जिससे यहाँ पढ़ने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य अंधकारमय हो रहा है। इस संबंध में ग्राम प्रधान सरस्वती देवी ने जिलाधिकारी बागेश्वर को पत्र लिखकर यथाशीघ्र शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है। संस्कृत विषय का शिक्षक नहीं, हिंदी भी बाधित इंटर कॉलेज पोथिंग में वर्तमान में 11वीं एवं 12वीं कक्षा के लिए संस्कृत विषय का कोई भी शिक्षक नियुक्त नहीं है। वहीं हिंदी विषय के शिक्षक भी लंबे समय से अवकाश पर चल रहे हैं, जिससे इंटर - [दिल्ली-NCR में पहाड़ों की सौगात लेकर आया महाकौथिग 2025](https://www.uttarakhandpost.in/mahakauthig-2025-brings-the-gift-of-the-mountains-to-delhi-ncr/): यदि आप नोएडा, दिल्ली या उसके आसपास के शहरों में पहाड़ी ऑर्गनिक उत्पादों, हस्तशिल्प या यहाँ के ऊनी वस्त्रों के शौक़ीन हैं और इन्हें खरीदना चाहते हैं तो आपके लिए यह एक बेहतरीन अवसर है। इसके लिए आपको आना होगा नोएडा स्टेडियम स्थित रामलीला मैदान में, जहाँ चल रहा है उत्तराखंड प्रवासियों का विंटर कॉर्निवल यानी महाकौथिग 2025, नोएडा के इस विशाल मैदान में 100 से अधिक स्टॉल्स पहाड़ी उत्पादों से सजे हुए हैं, जहाँ उत्तराखण्ड की संस्कृति, स्वाद और विरासत एक ही छत के नीचे देखने और खरीदने को मिलेगी। सेक्टर-21A स्थित नोएडा स्टेडियम में उत्तराखंड का पारंपरिक लोककला - [उत्तरायणी मेला बागेश्वर : जानें इसका इतिहास और खास बातें।](https://www.uttarakhandpost.in/uttarayani-mela-bageshwar-uttarakhand/): Uttarayani Mela Bageshwar: हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर उत्तराखण्ड के बागेश्वर में लगने वाला मेला ‘उत्तरायणी’ अथवा ‘उत्तरैणी’ के नाम से ख्याति प्राप्त है। पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक महत्व को समेटे इस मेले का शुभारम्भ वर्तमान में माघ पूर्णिमा की पूर्व संध्या से हो जाता है, जो करीब सप्ताह भर चलता है। यह मेला पूरे प्रदेशभर में प्रसिद्ध है। जिसमें लाखों लोग बाबा बागनाथ की नगरी में पहुँचते हैं।  इतिहासकारों के अनुसार सरयू, गोमती और सुप्त सरस्वती के संगम पर लगने वाले इस मेले की शुरुवात चंद वंशीय राजाओं के शासनकाल से हुई। भगवान शिव के - [बिर्थी फॉल (Birthi Falls)- शांति और रोमांच की दूधिया जलधारा।](https://www.uttarakhandpost.in/birthi-fall-uttarakhand/): उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में स्थित बिर्थी फॉल (Birthi Fall) हिमालयी क्षेत्र का एक बेहद खूबसूरत और आकर्षक झरना है, जो अपनी दूधिया धारा और मन को शांति का अनुभव कराने वाली पानी की बूंदों से भरी आने वाली हवा के झोंकों के साथ हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह स्थल प्रकृति की बेपनाह खूबसूरती का एक अद्भुत उदाहरण है, जहाँ शांति और रोमांच के साथ -साथ ट्रैकिंग, फोटोग्राफी, बर्ड वॉचिंग के शौक़ीन लोगों के लिए एक उपयुक्त पर्यटक स्थल है।  Birthi Falls : क्यों मिला यह नाम ? यह झरना उत्तराखण्ड के खूबसूरत गांव बिर्थी के समीप - [जिया कोरी कोरी खांदो | Jiya Kori Kori Khando Lyrics](https://www.uttarakhandpost.in/jiya-kori-kori-khando-lyrics-and-translation/): आजकल पहाड़ी युवाओं और युवतियों के जुवां पर एक गीत  “Jiya Kori Kori Khando” खूब चढ़ा हुआ है। जी हाँ ! गढ़वाली गीत, शीर्षक है- जिया कोरी कोरी खांदो, जिसका हिंदी अर्थ है – दिल कोर-कोर के खोखला कर रहा है यानि दिल कुरेद -कुरेद कर परेशान कर रहा है। सुन्दर अभिनय, मनमोहक दृश्य, संगीत, लिरिक्स और रैप ये सभी गीत को नई ऊंचाइयां प्रदान कर रहे हैं।    इस गीत को अपने मधुर स्वरों से सजाया है प्रसिद्ध लोक गायक किशन महिपाल ने। मशकबीन यूट्यूब चैनल से रिलीज़ इस गीत के वीडियो में अभिनय किया है तनु रावत और - [अनोखी विवाह परंपरा: जहां वेदी नहीं, भगवान बदरीनाथ की मूर्ति के फेरे लिए जाते हैं](https://www.uttarakhandpost.in/nirwali-village-unique-badrinath-marriage-tradition/): उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में एक ऐसा गांव है, जहां विवाह की परंपरा पूरे देश से बिल्कुल अलग है। हिंदू विवाह संस्कार में आमतौर पर वर–वधु अग्निवेदी के सात फेरे लेकर विवाह बंधन में बंधते हैं, लेकिन रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि ब्लॉक की ग्रामसभा धारकोट का निरवाली गांव इस परंपरा से अलग अपनी सदियों पुरानी संस्कृति को निभाता आ रहा है। यहां विवाह की वेदी नहीं होती, बल्कि उसकी जगह भगवान बदरीनाथ की मूर्ति को रखा जाता है, जिसे साक्षी मानकर फेरे लिए जाते हैं। निरवाली गांव के सती ब्राह्मणों की मान्यता है कि भगवान बदरीनाथ उनके आदिदेव हैं। विवाह - [Phool dei Festival 2026 : कौन हैं घोघा माता ?](https://www.uttarakhandpost.in/phool-dei-festival-and-ghogha-mata/): Phool dei Festival: चैत्र माह कि पहली तिथि यानि दिनांक 14 मार्च 2026 से पहाड़ में फूल संगरांद यानि बच्चों का प्रिय त्यौहार ‘फूलदेई’ शुरू हो रहा है। आप सभी को लोक पर्व फूलदेई की हार्दिक शुभकामनायें। आप सभी अपने बच्चों को पहाड़ के इस त्यौहार कि जानकारी अवश्य दे और इसका आयोजन भी करें। फूलदेई में अल सुबह नन्हे मुन्ने बच्चे घर घर जाकर मंगलकामना के ऋतु गीत गाते हैं। घोघा माता की डोली कंधे में रखकर सब को सुफल का आशीष देते है। घोघा माता को इस त्यौहार की आराध्य देवी माना जाता है जिसकी पूजा प्रतिष्ठा केवल - [हिन्दूकुश-हिमालय में बर्फ़ रुकने के समय में कमी भावी जल संकट के संकेत](https://www.uttarakhandpost.in/hindu-kush-himalaya-and-climate-change/): आजकल हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ खूब हुड़दंग मचा रहा है। जाड़ों के मौसम की उठापटक जो पहले से दिसंबर-जनवरी के महीनों में देखी जाती थी इधर के सालों में जाड़ों की वही बारिश, ओलावृष्टि, बर्फ़बारी की हरकतें फ़रवरी के आख़िरी हफ्तों से मार्च के आख़िर यहाँ तक गर्मियों में भी देखने को मिल रही हैं। पहले ऐसा किसी साल अचानक से देखने को मिलता था अब तो यह लेटलतीफी मौसम की एक आदत सी बन गई है। वहीं बर्फ़ पड़ने में आई कमी आमजन की आँखों ने भी पकड़ी है। बर्फ़ खिसकने की दुर्घटनाएं तो जुबाँ पर चढ़ी ही - [कुमाऊं की बैठकी होली पर एक विस्तृत लेख।](https://www.uttarakhandpost.in/famous-kumaoni-baithaki-holi/): Kumaoni Holi: संगीत और गायन दृष्टि से उत्तराखण्ड के कुमाऊं अंचल की होली विशिष्ट है। यहां होली गायन की दो विधाएं दिखायी देती हैं। ‘खड़ी होली‘ है जो ग्रामीण परिवेश के अत्यन्त निकट है उसमें आम जन की भागीदारी प्रमुखता से रहती है। इसका गायन फाल्गुन एकादशी से प्रारम्भ होकर पूर्णिमा के अगले दिन ‘छलड़ी‘ तक चलता है। इस होली में ‘होल्यार‘ गोल घेरे में घूमते हुए ढोल-मजीरे की ताल पर घर-आँगन में होली गायन करते हैं। कुमाऊं में होली गायन की दूसरी विधा ‘बैठ होली‘ के रुप में प्रचलित है। नगरीय परिवेश में इस होली का गायन सर्वाधिक दिखायी - [कुली बेगार आंदोलन - कारण, इतिहास और पृष्ठभूमि।](https://www.uttarakhandpost.in/kuli-begar-pratha-in-uttarakhand/): कुली बेगार आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो सन 1920 के दशक में उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में शुरू हुआ। यह आंदोलन अंग्रेजी हुकूमत के उस अन्यायपूर्ण प्रथा के खिलाफ था, जिसमें ग्रामीणों को जबरन कुली यानी मजदूर के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य किया जाता था। इस पोस्ट में हम कुली बेगार प्रथा, इसके खिलाफ आंदोलन, इतिहास, पृष्ठभूमि के बारे में जानेंगे। कुली बेगार प्रथा क्या थी आम आदमी से कुली का काम बिना पारिश्रमिक दिये कराने को कुली बेगार (Kuli Begar) कहा जाता था, विभिन्न ग्रामों के प्रधानों (पधानों) का यह - [उत्तराखंड में कत्यूरी और चंद राजवंश।](https://www.uttarakhandpost.in/katyuri-and-chand-dynasties-in-uttarakhand/): भारत के उत्तराखंड में राजवंशों की शासन श्रृंखला के बारे में अनेक पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर जो लिखा जाता रहा है एवं उसकी पांडुलीपियों और शिलालेखों से यहां के बारे में जो जानकारियां मिलती हैं वह उत्तराखंड के प्राचीन इतिहास और सभ्यता को समृद्धशाली बनाती हैं। उत्तराखंड की नई पीढ़ी इस समय अपने उच्चतम विकास की प्रत्याशा में यहां से पलायन कर रही है या फिर उसमें अपने पूर्वजों को पढ़ने और समझने में कम ही दिलचस्पी है। इतिहास वेत्ताओं का कहना है कि उत्तराखंड का इतिहास राजवंशों से इतना समृद्धिशाली है कि उनकी पृष्ठभूमि इस तथ्य की पुष्टि करती - [सरयू नदी का उद्गम और उसके निकट प्रमुख तीर्थ स्थल।](https://www.uttarakhandpost.in/origin-of-saryu-river-and-its-major-pilgrimage-sites/): भारत के पर्वतीय राज्य उत्तराखंड, जो अपनी नैसर्गिक सुंदरता और धार्मिक पर्यटक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं गंगा, यमुना जैसी जीवनदायिनी नदियों का उद्गम भी यहीं से होता है। इनके अलावा हिन्दू मान्यताओं में मोक्षदायिनी नदी कही जाने वाली ‘सरयू’ (Saryu River) का उद्गम स्थल भी उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पहाड़ों में ही है। मान्यतानुसार इस नदी में स्नान मात्र से ही सभी तीर्थों में स्नान करने का पुण्य प्राप्त होता है। आईये पढ़ते हैं सरयू नदी के उद्गम और उसके निकट प्रमुख तीर्थ स्थलों के बारे में – सरमूल सरयू मूल अर्थात् सरयू के उद्गम स्थल को ही ‘सरमूल’ - [बागेश्वर बागनाथ धाम की ऐतिहासिक जानकारी।](https://www.uttarakhandpost.in/historical-information-about-bageshwar-bagnath-dham/): Bageshwar Bagnath Dham : बागेश्वर, अत्यंत रमणीय और पावन नगर। जहां पतित पावनी सरयू नदी के तट पर कैलाश पति महादेव शिव बाबा बागनाथ के रुप में निवास करते हैं। साथ में बाबा काल भैरव द्वारपाल के रुप में निवास कर नगर की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस मनमोहक और पवित्र स्थान का दर्शन और पूजन करने हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु और सैलानी आते हैं। जिन्हें भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ यहां मौजूद आठवीं से चैदहवीं शताब्दी तक की मूर्तियों और शिलालेखों के दर्शन करने का भी सौभाग्य मिलता है। बागेश्वर को तीर्थराज प्रयाग और - [जागर - देवताओं को जगाने के लिए पवित्र आह्वान।](https://www.uttarakhandpost.in/jagar-sacred-calling-of-god/): भारत का उत्तराखंड राज्य पूरे विश्व में देवभूमि के नाम से विख्यात है। प्रमुख चार धाम, जागनाथ और बागनाथ धरती, गंगा, यमुना, सरयू, काली और गोरी जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम एवं हिमालय की विशाल पर्वतमालाएं इसी प्रदेश में हैं। यहाँ रहने वाले लोगों ने इस भूमि को और भी महत्ता दी है। उनके धार्मिक रीति-रिवाज और ईश्वर के प्रति अपार आस्था और विश्वास देश के अन्य प्रांतों से कहीं अधिक हैं। इसी आस्था, विश्वास और रीति का एक उदाहरण है ‘जागर’ जिसे देवताओं का पवित्र आह्वान कहा जाता है। आईये जानते हैं उत्तराखंड में लगने वाले “जागर” Jagar के - [साल 2025 के त्योहारों की लिस्ट (Hindu Festival Calendar 2025)](https://www.uttarakhandpost.in/hindu-festival-calendar-2025/): Hindu Festival Calendar 2025 : भारत अपनी धार्मिक मान्यताओं और परम्पराओं से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहाँ समय-समय पर मनाये जाने वाले तीज-त्यौहारों की अपनी अलग-अलग महत्ता है। आंग्ला कैलेंडर के हिसाब सेनया साल 2025, बुधवार 01 जनवरी से प्रारम्भ होगा। भले ही भारत में मनाये जाने वाले सभी तीज-त्योहार और धार्मिक अनुष्ठान हिंदी कैलेंडर (पञ्चाङ्ग) के अनुसार संपन्न होते हैं, लेकिन वर्तमान में इन तीज-त्योहारों की तिथि हम आंग्ल कैलेंडर के अनुसार ही करते हैं। हमारा देश विविध संस्कृतियों, धर्मों और परम्पराओं का देश है, जहाँ हर माह कोई न कोई तीज-त्योहार मनाया ही जाता है। यहाँ हम ## Pages - [Latest Post](https://www.uttarakhandpost.in/latest-news/) - [Home](https://www.uttarakhandpost.in/): राजनीति See All खेल See All अंतरराष्ट्रीय See All मनोरंजन See All राजनीति See All खेल See All अंतरराष्ट्रीय See All मनोरंजन See All - [Contact us](https://www.uttarakhandpost.in/contact-us/) - [Disclaimer](https://www.uttarakhandpost.in/disclaimer/): All the information on this website – https://UttarakhandPost.in – is published in good faith and for general information purpose only. 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