उत्तराखंड टूरिज्म: द काइज़न वे टू सस्टेनेबिलिटी एंड प्रोग्रेस पुस्तक का लोकार्पण और चर्चा।

On: December 15, 2024 9:23 PM
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देहरादून,15 दिसम्बर, 2024। वीएसएम ब्रिगेडियर (डॉ) बीपीएस खाती द्वारा लिखित पुस्तक उत्तराखंड टूरिज्म: द काइज़न वे टू सस्टेनेबिलिटी एंड प्रोग्रेस (The Kaizen Way to Sustainability and Progress) का लोकार्पण आज लैंसडाउन चौक स्थित दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के सभागार में किया गया। गढ़वाल पोस्ट के प्रधान संपादक और सीईओ श्री सतीश शर्मा, लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह, ब्रिगेडियर वीपीपीएस गुसाईं सहित अन्य अतिथि और मित्रजनों की उपस्थिति में इस पुस्तक का लोकार्पण किया गया।

अतिथि वक्ताओं ने कहा कि दुनिया भर में सभी उद्योगों, सेवाओं, पर्यावरण मानव संसाधन, जलवायु परिवर्तन और अन्य प्रथाओं के लिए संधारणीय प्रथाएँ चर्चा का विषय बन गई हैं। मनुष्य की आत्म-विनाश की प्रकृति ऐसे सभी मुद्दों पर अपनी छाप छोड़ रही है। ऐसे में पर्यटन के सतत विकास की नितान्त जरुरत समझी जानी चाहिए। वक्ताओं ने यह भी कहा कि पर्यटन, दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग, वैश्वीकृत दुनिया में निरंतर प्रासंगिकता दिखा रहा है। विकास की इतनी जबरदस्त संभावनाओं के साथ, स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण के संरक्षण के लिए सावधानीपूर्वक योजना, विकास और प्रबंधन आवश्यक है।

वक्ताओं ने इस पुस्तक के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि लेखक को बारे पर्यटन विषय की बहुत गहरी समझ है और उन्होंने इस पुस्तक के माध्यम से पर्यटन के दीर्घकालिक लाभ और अस्तित्व के उद्देश्य को रेखांकित करने का शानदार प्रयास किया है।

पुस्तक के लेखक ब्रिगेडियर बीपीएस खाती ने कहा कि काइज़ेन एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ है क्रमिक और व्यवस्थित, निरंतर सुधार। काइज़ेन का शाब्दिक अर्थ है परिवर्तन (काई – परिवर्तन, ज़ेन – अच्छा बनना)। काइज़ेन रणनीति लोगों के साथ शुरू होती है और खत्म होती है। काइज़ेन के साथ शामिल नेतृत्व लोगों को उच्च गुणवत्ता, कम लागत और समय पर डिलीवरी की अपेक्षाओं को पूरा करने की उनकी क्षमता में लगातार सुधार करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। ब्रिगेडियर खाती ने कहा कि कैज़ेन प्रबंधन सिद्धांतों के अनुसार आगे बढ़ने की उनकी जोरदार वकालत व्यावहारिक, भविष्योन्मुखी और उत्तराखंड के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है, जहाँ 70 प्रतिशत भूभाग में जंगल और पहाड़ हैं।

लोकापर्ण के पश्चात पुस्तक पर एक चर्चा का आयोजन किया गया। लेखक, विचारक और विश्लेषक ब्रिगेडियर वीपीपीएस गुसाईं के साथ अकादमिक,कवि,लेखक व स्तम्भकार रत्ना मिनोचा ने पुस्तक के विविध पक्षों पर महत्वपूर्ण बातचीत की।

इस बातचीत में यह बात उभर कर आयी कि पर्यटन, दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग, वैश्वीकृत दुनिया में निरंतर प्रासंगिकता दिखा रहा है। विकास की इतनी जबरदस्त संभावनाओं के साथ, स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण के संरक्षण के लिए सावधानीपूर्वक योजना, विकास और प्रबंधन आवश्यक है।

बातचीत में पर्यटन से जुड़े अन्य बिन्दुओं पर भी बात हुई। कहा गया कि पर्यटन प्रक्रियाएँ जटिल और परस्पर जुड़ी हुई हैं और वे संकटों की अधिकता का संकेत देती हैं, जैसे कि पर्यटन स्थलों पर भीड़भाड़, अत्यधिक उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत का ह्रास/विनाश, स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच संघर्ष, प्रत्येक गंतव्य/क्षेत्र की विशिष्ट राजनीतिक, सामाजिक आर्थिक, पर्यावरण संबंधी समस्याएँ। अपराध, ड्रग्स आदि समस्याएँ और भी बढ़ जाती हैं।

लेखक ब्रिगेडियर खाती, उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के मूल निवासी हैं। वे अपने परिवार में दूसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी हैं। वे प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र हैं।उन्हें जून 1973 में 3 पैरा (1 कुमाऊं) पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) में कमीशन दिया गया था। वह रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज से स्नातक हैं तथा उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में एम.एस.सी. की डिग्री प्राप्त की है। डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, तत्कालीन आगरा विश्वविद्यालय (यूपी) से उन्होंने पर्यटन प्रबंधन में मास्टर और डॉक्टरेट की डिग्री भी प्राप्त की है। उन्होंने पहले ही टूरिज्म, एनवायरनमेंट एंड मैन, सस्टेनेबल टूरिज्म नामक पुस्तक लिखी है।उन्होंने पर्यटन के प्रभाव (सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक आदि) और प्रभावों का विश्लेषण करने और कुछ उत्तर प्रदान करने का प्रयास किया है।

डॉ. ए.के. सिंह, सीनियर रीडर, इतिहास, संस्कृति और पर्यटन विभाग, अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा और डॉ. सी.के. सिंह, प्रबंधन अध्ययन के प्रोफेसर और प्रबंधन के विभिन्न क्षेत्रों में पीएचडी करने वाले बड़ी संख्या में छात्रों के मार्गदर्शक हैं।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के प्रोग्राम एसोसिऐट चन्द्रशेखर तिवारी ने उपस्थित अतिथिजनों व लोगों का स्वागत किया। इस अवसर पर शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, सैन्य अधिकारी, लेखक और अन्य लोग उपस्थित रहे।

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