उत्तराखण्ड में छिपा है CM Yogi की कुर्सी का रहस्य !

On: January 18, 2026 9:45 PM
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cm yogi chair

क्या आप जानते हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब जिस कुर्सी पर बैठते हैं वह सिर्फ सत्ता की कुर्सी नहीं, वो हिमालय से निकली है, वो केदारनाथ की यादों से जुड़ी है और वो जहाँ रखी जाती है वहां देवदार की सौंधी सुगंध अपने आप महकने लगती है। क्या आप जानते हैं इस कुर्सी में लकड़ी नहीं उत्तराखण्ड का स्नेह है, मंदिरों की नक्काशी है, सिंह की शक्ति है और भगवा रंग में लिपटी साधना की छाया है। यह एक कुर्सी नहीं उससे कहीं ज्यादा है। आईये विस्तृत में जानते हैं –   

योगी आदित्यनाथ का उत्तराखण्ड से रिश्ता सिर्फ जन्म से नहीं, बल्कि भावनाओं और आस्था से भी जुड़ा है। यह जुड़ाव एक बार फिर तब सामने आया, जब मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उन्हें उत्तराखण्ड के देवदार की एक पवित्र लकड़ी से बनी कुर्सी भेंट की गई और उन्होंने इस कुर्सी को सहर्ष गोरखनाथ मंदिर के मुख्य सभागार में प्रतिष्ठित कर दिया। यह भेंट उन्हें स्वयं गोरखपुर पहुंचकर उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री (सेवानिवृत्त कर्नल) अजय कोठियाल ने की।    

कर्नल अजय कोठियाल के अनुसार, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण परियोजना के दौरान देवदार की पवित्र लकड़ी का बड़े स्तर पर उपयोग हुआ था। उसी दौरान बची कुछ देवदार लकड़ी को देखकर उनके मन में विचार आया कि इसका उपयोग किसी ऐसे कार्य में होना चाहिए, जो आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष हो। इसी भाव से उन्होंने योगी आदित्यनाथ के लिए यह अनूठी कुर्सी तैयार कराने का निर्णय लिया।

इस कुर्सी का स्वरूप उत्तराखण्ड की समृद्ध मंदिर परंपरा से प्रेरित है। इसके डिजाइन को प्रसिद्ध आर्किटेक्ट श्री कृष्ण कुडियाल ने आकार दिया, जिन्होंने राज्य के विभिन्न प्राचीन मंदिरों की वास्तुकला का गहन अध्ययन किया। अंतिम डिजाइन को चकराता के पास कोटा गांव के पारंपरिक काष्ठ शिल्पकारों ने करीब 15 दिनों की कड़ी मेहनत और बारीक कलाकृति से जीवंत किया।

कुर्सी के दोनों हत्थों पर शक्ति और संरक्षण के प्रतीक सिंह की आकृतियां उकेरी गई हैं, जबकि पीछे की ओर उत्तराखण्ड के मंदिरों में दिखने वाली पारंपरिक नक्काशी मन मोह लेती है। इसके निर्माण में योगी आदित्यनाथ के प्रिय भगवा रंग का विशेष ध्यान रखा गया है। कर्नल कोठियाल बताते हैं कि इस कुर्सी में मुख्य रूप से उत्तराखण्ड के हनोल स्थित महासू मंदिर की विशिष्ट काष्ठ कला को समाहित करने का प्रयास किया गया है।

बतौर महंत योगी आदित्यनाथ को भेंट की गई यह कुर्सी उन्हें बेहद पसंद आई। यही वजह है कि इसे गोरखनाथ मंदिर के मुख्य सभागार में स्थापित किया गया है। खास बात यह भी है कि देवदार की लकड़ी से उठती सौंधी और पवित्र सुगंध पूरे सभागार के वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ संन्यास धारण करने से पूर्व उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित पंचूर गांव के रहने वाले थे। ऐसे में यह देवदार की कुर्सी उनके जन्मभूमि से जुड़े संस्कारों और स्मृतियों का भी प्रतीक बन गई है, जिसने उत्तराखण्ड और गोरक्षपीठ के रिश्ते को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया है।

कर्नल अजय कोठियाल और आर्किटेक्ट कृष्ण कुडियाल

कर्नल अजय कोठियाल 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद धाम के पुनर्निर्माण के प्रमुख सूत्रधारों में से एक रहे हैं। उस कठिन दौर में उनके योगदान को देश-प्रदेश में व्यापक सराहना मिली। वर्ष 2022 में उन्होंने आम आदमी पार्टी से मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में विधानसभा चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और वर्तमान में दर्जा राज्यमंत्री हैं।

वहीं, इस विशेष कुर्सी के शिल्पकार आर्किटेक्ट कृष्ण कुडियाल दून स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के बाद आईआईटी रुड़की से स्नातक हैं। वे उत्तराखंड की पारंपरिक वास्तुकला और काष्ठ कला को आधुनिक सोच के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

विनोद सिंह गढ़िया

विनोद सिंह गढ़िया इस पोर्टल के फाउंडर और कंटेंट क्रिएटर है। करीब 15 वर्षों से वे विभिन्न डिजिटल मंचों के माध्यम से उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन आदि से जुड़े लेख और सम-सामयिक घटनाओं पर आधारित समाचार आप सभी तक पहुंचाते हैं।

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