चला फुलारी फूलों को-फूलदेई गीत

On: March 8, 2026 1:11 PM
Follow Us:
Chala Phulari Phoolon Ko Lyrics

चला फुलारी फूलों को, सौदा-सौदा फूल बिरौला- उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई (Phool dei) का एक प्रसिद्ध गीत है, जिसके लिरिक्स गढ़वाली भाषा में हैं। वर्तमान में यह गीत बसंत ऋतु के आगमन पर यहाँ के नन्हे बच्चों द्वारा गाया जाता है। जो चैत्र की संक्रांति पर फुलारी (फूलदेई के दिन फूल अर्पित करने वाले नन्हे बच्चे) को बसंत में खिले ताजे फूल तोड़ने और घर-घर जाकर दहलीजों पर फूल अर्पित करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करने के लिए प्रेरित करता है। इस पोस्ट में हम इस लोकगीत के लिरिक्स प्रस्तुत कर रहे हैं।

Chala Phulari Phoolon Ko Lyrics

चला फुलारी फूलों को
सौदा-सौदा फूल बिरौला

हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि फ्योंली लयड़ी
मैं घौर छोड्यावा
हे जी घर बौण बौड़ीगे ह्वोलु बालू बसंत
मैं घौर छोड्यावा
हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि

चला फुलारी फूलों को
सौदा-सौदा फूल बिरौला
भौंरों का जूठा फूल ना तोड्यां
म्वारर्यूं का जूठा फूल ना लायाँ

ना उनु धरम्यालु आगास
ना उनि मयालू यखै धरती
अजाण औंखा छिन पैंडा
मनखी अणमील चौतर्फी
छि भै ये निरभै परदेस मा तुम रौणा त रा
मैं घौर छोड्यावा
हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि

फुल फुलदेई दाल चौंल दे
घोघा देवा फ्योंल्या फूल
घोघा फूलदेई की डोली सजली
गुड़ परसाद दै दूध भत्यूल

अयूं होलू फुलार हमारा सैंत्यां आर चोलों मा
होला चैती पसरू मांगणा औजी खोला खोलो मा
ढक्यां द्वार मोर देखिकी फुलारी खौल्यां होला

गीत और पर्व के मुख्य विवरण:

  • अर्थ: “चलो फुलारी (फूल चुनने वाले बच्चे), हम सब मिलकर बंसत में खिले ताजे-ताजे फूल चुनते हैं”।
  • सन्दर्भ: यह गीत बताता है कि बसंत ऋतु में ‘फ्योंली‘ के पीले फूल खिल गए हैं और फूलों की देवी को पूजने का समय आ गया है।
  • पर्व की परंपरा: बच्चे सुबह-सुबह हर घर के दरवाजे पर जाकर फूल अर्पित करते हैं, जिसके बदले में उन्हें गुड़, चावल और पैसे मिलते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह पर्व प्रेम, त्याग और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है।
  • रचना: इस लोकप्रिय लोकगीत को उत्तराखंड के प्रसिद्ध गायक नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने अपनी मधुर आवाज और रचना से अमर किया है।

विनोद सिंह गढ़िया

विनोद सिंह गढ़िया इस पोर्टल के फाउंडर और कंटेंट क्रिएटर है। करीब 15 वर्षों से वे विभिन्न डिजिटल मंचों के माध्यम से उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन आदि से जुड़े लेख और सम-सामयिक घटनाओं पर आधारित समाचार आप सभी तक पहुंचाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment