लोकसंस्कृति को बढ़ावा: कपकोट उत्तरायणी मेले में चाँचरी प्रतियोगिता, मिलेंगे 51 हजार।

On: January 10, 2026 10:12 PM
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uttarayani mela kapkot

कपकोट-भराड़ी में लगने वाले पारंपरिक उत्तरायणी मेले में इस बार कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति के विशेष रंग देखने को मिलेंगे। मेले में इस बार तल्ला, मल्ला, विचला दानपुर, मुनस्यारी, रंगीली नाकुरी समेत कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों की चांचरी की लटैक लोगों को आकर्षित करेगी। नगर पंचायत कपकोट के प्रयासों से इस बार क्षेत्र में लगने वाले उत्तरायणी मेले में कुमाऊँ की लोकनृत्य-गीत विधा चांचरी का भव्य आयोजन किया जायेगा। जिसके लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। यह आयोजन यहाँ प्रतियोगिता के तौर पर सम्पन्न होगा, जिसमें प्रथम और द्वितीय स्तर पर नगद पुरस्कार दिए जायेंगे।

कपकोट-भराड़ी में हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर उत्तरायणी मेला (Uttrayani Mela) लगता है, जो मुख्यतः माघ माह के 2 गते से प्रारम्भ होता है। समय के साथ-साथ कपकोट क्षेत्र के इस मेले ने बागेश्वर में लगने वाले उत्तरायणी मेले की तरह ही भव्य रूप ले लिया है। जहाँ विभिन्न स्कूलों के बच्चों द्वारा झांकियां निकाली जाती हैं। केदारेश्वर मैदान में विभिन्न विभागों और महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल लगते हैं। वहीं दानपुर के पुराने बाजार भराड़ी में लोग जमकर खरीददारी करते हैं।

उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से इस बार कपकोट भराड़ी के उत्तरायणी कौतिक में पहली बार झोड़ा चांचरी प्रतियोगिता का आयोजन होगा। जिसमें प्रथम स्थल प्राप्त करने वाली टीम को 51,000 रूपये का नगद पुरस्कार दिया जायेगा। वहीं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 11,000 रूपये का नगद पुरस्कार देने की घोषणा नगर पंचायत कपकोट ने की है।

उत्तरायणी कौतिक कपकोट में आयोजित होने वाली चांचरी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए किसी भी दल को सर्वप्रथम नगर पंचायत के कार्यालय में आवेदन कर पंजीकरण करना अनिवार्य होगा, जिसकी अंतिम तिथि दिनांक 13 जनवरी 2026 है। वहीं प्रतिभाग करने वाले दल में कम से कम 25 प्रतिभागी होने आवश्यक हैं और जिनमें 2 हुड़के वादकों का होना भी जरूरी है। यह प्रतियोगिता कपकोट के केदारेश्वर (केदारीबगड़) मैदान में दिनांक 17 जनवरी 2026 को प्रातः 11 बजे आयोजित की जाएगी।

नगर पंचायत कपकोट ने क्षेत्र के लोक कलाकारों, महिला मंगल दलों और सांस्कृतिक टीमों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है, ताकि कुमाऊँनी लोकनृत्य चाचरी की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।

विनोद सिंह गढ़िया

विनोद सिंह गढ़िया इस पोर्टल के फाउंडर और कंटेंट क्रिएटर है। करीब 15 वर्षों से वे विभिन्न डिजिटल मंचों के माध्यम से उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन आदि से जुड़े लेख और सम-सामयिक घटनाओं पर आधारित समाचार आप सभी तक पहुंचाते हैं।

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